Legal Question in Family Law in India

45/सरूपी सरस्वती

फ्लॅट नो:-106,नया नगर

मीरा रोड (ई)

मुंबई-401 107

मॉब:-9324948070.

मे भी अपने पति की सताई हुई अकेली मा हू मेरी शादी मे 1990 मे राजीव चतुर्वेदी से हुई थी मेरे ससुराल वालो ने खूब दहेज मागा ओर साथ मॅ मुंबई मे घर के लिए कॅश जो मेरे डेडी ने डी.डी ओर कॅश से दीया जो आप शादी के फोटो ओर सी डी मे देख सकते है, तब जाकर ये घर लिया ससुराल बालो ने शादी से पहले कहा था घर हम जॉइन्ड नाम से लेंगे यानी मेरे ओर मेरे ससुर के नाम से पर ऐसा नही हुआ जो मुझे शादी के बाद पता चला. वो सिर्फ मेरे ससुर के नाम से ही था ओर उनके मरने के बाद अब मेरी सास के नाम हो गया. मेरा तो जैसे कोई बजूद हे नही. मुझे दहेज के लिए खूब परेशान किया गया यहा तक की मे जब प्रग्नेट थी तो मुझसे कहा की पहले अपने बाप से 100000 रु. लेकेर आओ नही तो बचा गिरा दो ओर जुलाइ 90 मे धोके से मेरे पति ने मुझे गोलिया खिला दी जिसकी वजह से मे हॉस्पिटल पहुच गई आप अंधेरी चोक्शि हॉस्पिटल मे पता कर सकते है. तब मेरे डेडी ने इन लोगो को बहुत डराया. मेरी ओर मेरे बचे की जान तो बच गई पर एक डर मन मे बैठ गया था की ये पता नही कब मार दे ओर मे अपने मायके मे ही रहने लगी फिर 8 महीने बाद मुझे इन्होने गावं भेज दिया अपने मा बाप के पास वही मेरे बेटे का फेब 91 मे जनम हुआ पर इन लोगो का मुझे सताना बंद नही हुआ था रोज कुछ ना कुछ मागते. मेरे डेडी ने मुंबई मे घर के लिये पेमेंट दिया था ओर घर की सब चीज़े सुई से लेकर टी वी फ्रिड्ज तक जो आप फोटो ओर सी डी मे देख सकते हे ओर ऑगस्ट 91 मे ये घर ले लिया ओर मे यहा आ गई तब से मे आज तक यही रह रही हू इस बीच बहुत ही क्लेश हुए मेने इन लोगो की शिकायत यहा के महिला मंडल मे भी की, उन लोगो ने कई बार सुलह भी कराई इन लोगो ने मेरा मायके जाना बंद कर दिया ना मे जा सकती थी ना वहा से कोई आ सकता था घर का फोन भी कटवा दिया था यानी की बिल नही भरा तो काट गया फोन भी मेरे नाम से है मेरे डेडी ने लगवाया था. इसी तरह कई साल निकल गये पर दहेज के लाल ची लोग कब शांत बैठ सकते है. इस बीच ये कई बार घर छोड़ छोड़ कर पता नही कहा चले जाते थे कई-कई दीन तक घर नही आते फिर मेरे घर वाले इनको इनके ऑफीस से पकड़ कर लाते थे. उनके जाने के बाद फिर चले जाते घर कैसे चल रहा था इनको कोई मतलब नही इसमे इनकी मा बराबर साथ दे रही थी इनके पिता का तो देहांत हो चुका था ओर घर सास के नाम हो चुका था,तो वो इस घर को बैच्ने की जिद्द कर रही थी कह र्ही थी तुम अपने मा बाप के चली जाओ या मर जाओ ये घर तो अब मे बेचुगी नही रहेगा मेरा बेटा तेरे साथ. ओर मे अपना हक़ माग रही थी मे क्यू जाउ इस घर से ? मेने फिर महिला मंडल मे शिकयत् की उन्होने फिर इनको समझाया कोण ओरोत अपना घर बिगाड़ना चाहती है बेटा भी छोटा था मे कहा जाती मेरे मा-बाप तो वैसे ही परेशन थे मेरा 1 ही भाई था 22 साल का जिसका रोड आक्क्सीडेंट मे देहांत हो गया उनकी तो अब कुछ इनकोमे ही नही थी वो मुझे क्या खिलाते ओर ऑक्टोबर 1999 मे इनके साथ दीवाली पर ग्वालियर चली गई इनकी मा वही रहती थी वहा इन सब ने मिलकर मुझे बहुत मारा पिटा कोई दीन तक कमरे मॅ बंद रखा ओर फिर मथुरा जिस घर मे मेरी शादी हुई थी वही लाकर सारे समाज के लोगो को इकहट्टा कर मुझे खाली हाथ घर से निकाल दिया बेटे को भी नही दे रहे थे पर बेटे को तो एक बुजुर्ग यू कह कर ले आए की मे अभी इसको ले आवुनगा नही तो ये लोग तो ऐसे है की मुजसे बदला लेने के लिए मेरे बेटे को ही मार देते. यहा तक की मेरा इस्त्री धन भी सब मेरी सास ने रख लिया मुझे पैसे पैसे को मोहताज कर दिया था, मे एकदम खाली हाथ थी बस तन पर कपड़े थे सास तो कहती थी तुझे नगा करके घर से निकालूँगी क्यू की मे उनकी मागे पूरी नही कर रही थी,हा यहा एक बात बताना जरूरी समजती हू मेरी सास मुझे अपने दामाद ओर मेरे देवेर की मालिश करने को कहती ओर ये भी उसमे साथ देते मॅ कुछ कहती तो कहते मालिश ही तो करनी है साथ मॅ सुला तो नही रहे. अब आप ही बताओ ऐसा कोई ओरत कैसे कर सकती है. पर ये लोग इतना गिर गये थे की मुंबई का घर जहा मे अपने पति के साथ रहती थी जो मेरे डेडी की वजह से इन्होने खरीदा था वाहा पर जाकर ताला बदल आए ओर सोसाइटी मे लेटर दे आए की मुझे ना घुसने दिया जाए अब हमारा उस से यानी की मुजसे कोई संबंध नही. बाते तो बहुत हे पर अभी इतना ही.आज करीब 15-16 सालो से एक तरह से तो मे शुरू से ही पति से अलग हू पर पूरी तरह से 15-16 से मे अपने बेटे के साथ रह रही हू मेरे पति ने मेरा सबकुछ छिन कर मुझे 1999 मे घर से निकाल दिया था, वो दीं है ओर आज का दीन मे उसी घर मे रह रही हू आकर मेने सब सोसाइटी वालो के ओर महिला मंडल के सामने क्यूकी उनको मे वहा से सब बता चुकी थी ताला तोड़ा ओर अपने बेटे के साथ रहने लगी इनलोगो को पता चला तो सास ने सोसाइटी मे ओर एक ओर लेटर दे दिया की मुझसे मेंटेनेन्स या कुछ भी लेन देंन ना किया जाए मे दूँगी मेरा घर है.उस्के बाद इन लोगो ने कभी मूड कर भी नही देखा की हम मा बेटे जिंदा है या मर गये न ही मुझे तलाक दिया ओर न ही कुछ खर्चा. हा एक बार 2001 मे मेने इन लोगो की पोलीस कंप्लेन की थी जिसकी कॉपी मेरे पास है. तब से आज तक पूरा मेंटेनेन्स ओर वॉटर टॅक्स मॅ भर रही हू जो इनके टाइम से बहुत पहले से बाकी था सब क्लियर किया सब चेक से दे रही हू ओर आज तक क्लियर है. बस तब से मे बेटे के साथ अकेली जिंदगी काट रही हू,अब मेरा बेटा भी एम बी करके ह्यद्राबाद घर से दूर नोकरी कर रहा है मे भी नोकरी करती हू पर मेरी सॅलरी बहुत कम है, ओर जहा मे रहती हू ये एरिया पूरा मुस्लिम है यह सिर्फ मे एक अकेली हिन्दू ओरत हू ये लोग भी मुझे बहुत परेशान करते है ,मे यहा से जाना चाती हू पर कहा जाउ मेरी छत छिन जाएगी जिसको मेने अपने आसुओ से शीचा है. मेरे पास इतने पैसे नही की मे एक घर खरीद सकू,बेटे की अभी नोकरी लगी है ओर वैसे भी उस से क्या उम्मीद जब पति ने ही धोका दे दिया तो ? क्या आप मेरी कुछ मदद कर सकते हैं मे बहुत परेशान हू. मेरे पति से इतने सालो का खर्चा ओर मेरा जो इस्त्री धन लिया है वो दिलवा दे तो मे भी अपने भबिस्य को सेफ कर लू अबतक बहुत ही मानसिक पीड़ा झेल चुकी पर अब नही होता. इसके लिए मुझे आपसे बहुत हे उम्मीद है मे क्या करू कोई भी नही मेरा कृपया आप मेरी मदद करे.

Archana Chaturvedi


Asked on 9/21/14, 12:11 am

1 Answer from Attorneys

Dear archana madam call me on 9422611385 for detail discussion. I am from pune and also work in mumbai

Adv prasad patil

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Answered on 9/21/14, 1:44 am


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